Hindi Ka Sanskritik Parivesh / हिन्दी का सांस्कृतिक परिवेश
Author
: Lalji Singh
Language
: Hindi
Book Type
: Reference Book
Category
: Hindi Grammar, Language & Linguistics
Publication Year
: 1974
ISBN
: 9VPHKSPH
Binding Type
: Paper Back
Bibliography
: viii + 236 Pages, Size : Demy i.e. 22.5 x 14.5 Cm.

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इस कृति में श्री लालजी ङ्क्षसह ने प्रामाणिकता के साथ यह स्पष्ट किया है कि भाषा की स्वत:स्फूर्त चेतना निरन्तर सांस्कृतिक सृजनशीलता से गतिशील रहती है। इसलिए भाषा के जन्म तथा विकास के इतिहास में संस्कृति का महत्त्व अक्षुण्ण है। भारतीय संदर्भों में हिन्दी भाषा की जो अवस्था आज हमारे समक्ष वर्तमान है वह भौगोलिक वैभिन्न्य के समस्त सांस्कृतिक सूत्रों को जोडऩे वाली एकमात्र कड़ी है। इसके पीछे क्रियाशील तत्त्वों की एक लम्बी परम्परा है, सर्जनात्मक संघर्ष की विभिन्न प्रक्रियाएँ तथा स्थितियाँ लगभग 135 वर्षों से वर्तमान है। विदेशी शासन की राजनैतिक तथा सामाजिकाॢथक साजिशों के बीच भाषा का प्रश्न सदैव जागृत रहा है और लदी हुई अंग्रेजी भाषा के समक्ष मातृभाषा की जिजीषवा अपने गौरवान्नयन के लिए संघर्षरत रही है। सांस्कृतिक विरासत तथा सामाजिक ऐतिहासिकता को सुरक्षित रखती हुई मातृभाषा की गतिशीलता में कौन-सी बाधाएँ थीं, सर्जनात्मकता की क्या रूढिय़ाँ थीं तथा विकास के पथ में विघटन के कौन से तत्त्व थे—इन सबका अध्ययन भारतीय पृष्ठभूमि तथा परिवेश में-इस ग्रन्थ का प्रमुक प्रतिपाद्य है। साथ ही अन्तप्रान्तीय भाषाओं के संदर्भ में हिन्दी की स्थिति तथा सम्बन्धों का गंभीर विवेचन हिन्दी के भविष्य को प्रस्तुत करने में सक्षम है।